कुत्ते कि दूम…

डिस्कवरी चैनल पर आप लोगों को जंगल और जंगली जानवरों पर तो कई वृत्तचित्र देखने को मिल जाते हैं| लेकिन शहर और उसके जानवरों को इन अंग्रेजो खासा अनदेखा करा हुआ है| ख़ैर गलती उनकी भी नहीं है उनके तो शहरों में जानवर होते ही नहीं है तो बेचारे उनके बारे में सोचे तो सोचे कैसे| पर हम भारतीयों को तो इस विषय में सोचना चाहिए| तो चलिए यह काम भी आज कर लेते है| भारत के शहरों में कई प्रजाति के जानवर पाए जाते हैं| नामवर – गाय, भैस, बैल,साँड़, बकरी, सूअर, बंदर आदि इत्यादी| मगर इन सब में सबसे आगे और सबसे उभर कर आता है एक नाम और वो है, कुत्तों का|

जी हाँ, सड़क का कुत्ता एक ऐसा जीव है जो आपको भारत के छोटे से छोटे गाँव और बड़े से बड़े शहर में भी मिल जाएगा| भारत को अनेकता में एकता की मिसाल बनाने में कुत्तों का भी बड़ा हाथ है| प्राय भूरे या काले रंग में पाया जाने वाला यह प्राणी अधिकतर झुण्ड में रहना पसंद करता है| इनके हर झुण्ड का इलाका तय होता है| अगर भूले से किसी दूसरे इलाके का कुत्ता इनके इलाके में आ गया, तो समझो आज तो उसकी मौत ही हुई| अपनी “भौंको” की बौछार से यह घुसपैठिये कुत्ते का हाल विपक्ष द्वारा घिरे मनमोहन सिंग की तरह कर देते हैं| यह देख कर आभास होता है की शायद असुरक्षा की भावना महिलाओं के बाद अगर किसी प्राणी में सबसे ज्यादा होती है तो वो है कुत्ता|

और इनके भौकने का तो क्या कहना, अगर सॉफ्टवेर की भाषा में कहूँ तो इनका भौकना एक ऐसे लूप का execution है, जिसमे break statement नहीं है| एक बार शुरू हुआ तो फिर सिस्टम हेंग होने पर ही रुकेगा| अनवरत घंटो तक यह यूँ भौकते रहते है मानो यह भौकना चालू करके भूल चुके हैं| जिस तरह हमारे लिए सांस लेना एक सहज क्रिया है, कुत्तों के लिए भौकना है|

कुत्तों की दिनचर्या पर अगर नज़र डालें तो आप पाएंगे कि कुत्ते मुख्यतः निशाचर होते हैं| दिन में इन्हें किसी गाडी या पेड़ की छांव में सुस्ताते हुए देखा जा सकता है| मगर रात होते ही यह पुरे इलाके में मुस्तैदी से फैल जाते हैं| इलाके की चौकीदारी के प्रति इनके समर्पण को देख कर लगता है कि शायद जब सृष्टि कि रचना के समय चौकीदारी का टेंडर निकला था तो इनका ही पास हुआ होगा| और शायद सृष्टि के अंत तक यह जीव इसी प्रकार रातों को जाग कर चौकीदारी करता हुआ पाया जाएगा|

कुत्तों के सोने के इस उलटे पैटर्न ने बचपन में मुझे बड़ी मुसीबत में भी दाल दिया था| संस्कृत कि कक्षा में एक श्लोक पढाया जा रहा था जिसमे बताया गया था कि विधार्थी की नींद कुत्ते की तरह होने चाहिए| मैं अकस्मात ही शिक्षिका से पूछ बैठा कि क्या हमे भी दिन में सोना और रात में जागना चाहिए| जवाब सुने नहीं दिया सीधे गाल पर महसूस हुआ|

ख़ैर, कुत्तों कि बाकी गतिविधियों पर अगर ध्यान दें तो पाएँगे कि कुत्ते गाडियों का पीछा करने के बड़े शौक़ीन होते है| यह इनका राष्ट्रीय खेल है| हो सकता है कुछ समय में इसे ओल्य्म्पिक में शामिल करने कि मांग उठाई जाए| इस खेल के शौक में कई कुत्ते रोज शहीद भी हो जाते है, मगर शौक बड़ी चीज़ है|

वैसे, यह जीव जितना निकम्मा दिखता है उतना है नहीं| कहा जाता है कुत्तों को साक्षात् यमदूतों के दर्शन होते है| और ऐसा होने पर यह रोने लगते है| तो अगली बार जब आप आस पास किसी कुत्ते को रोता हुआ सुने तो पहली फुर्सत में सफ़ेद कुरता पायजामा निकल लीजिए| मोहल्ले में किसी शवयात्रा में शरीक होना पड़ सकता है| इस तरह कुत्ते आपको पहले से तैयार रहने में मदद करते है| अपनी इसी काबिलियत के चलते कुत्तों को तंत्र विद्या में उच्च स्थान प्राप्त है|

कुत्तों का योगदान केवल ऐसी उच्च कोटि की विद्याओं तक सीमित नहीं है| लोकप्रिय संस्कृति यानि कि पोपुलर कल्चर में भी कुत्तों ने कई अमूल्य योगदान दिए हैं| सोचिए कि अगर कुत्ते न होते तो “कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊंगा” और “बलवंत राय के कुत्तों!” जैसे अजेय संवाद हमे कहाँ मिल पाते| साहित्य में भी कुत्तों का एक बड़ा योगदान रहा है, “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का” “कुत्ते कि दूम टेढ़ी कि टेढ़ी” “दूम दबा के भागना” और न जाने इन जैसे कितने मुहावरे, लोकोंक्तियाँ हैं जिनकी कल्पना कुत्तों के बिना असंभव है|

महिलाओं को खासकर के कुत्तों का आभारी होना चाहिए क्यूंकि कुत्तों ने इस विश्व में अवतार ले कर महिलाओं को पुरुषों के लिए एक उपयुक्त और सम्पुर्ण उपमा दी है| जिसका उपयोग हर महिला गाहे-बगाहे करती ही है(“Men are dog/मर्द कुत्ते हैं”)|

इसके अलावा कुत्ते मनोरंजन का भी एक साधन होते हैं| इनके रोज के गैंगवार टाइमपास का एक अच्छा जरिया हैं| गली के बच्चो के लिए कुत्तों कि कुछ क्रियाएँ (जिन्हें यहाँ लिखना उचित नहीं होगा) मनोरंजन का प्रमुख स्त्रोत्र होती हैं|

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि एक लेख में इस महान जीव को कैप्चर करना असंभव है| इसलिए मैं अब अपनी कलम को विराम देता हूँ| बहार कुत्तों का गैंगवार फिर शुरू हो चूका है|

आशा करता हूँ कि इस लेख को पढ़ कर कुत्तों के महान और जनकल्याणकारी जीवन के बारे में आपको काफी ज्ञान मिला होगा| अगर आपको लगता है कि मैंने कुछ मिस कर दिया है, तो बेहिचक अपनी टिप्पडी मेरे ब्लॉग पर करें| और समस्त पाठकों का ज्ञान वर्धन करें|

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About Rohan Kanungo

Suffering from a disorder that leads to a constant mental escape to other universes and create stories, images and what-not in my mind. I love making friends and catching up with them. Travelling is something which I like a lot but am not able to do much, so I do the next best thing - Reading. I love looking through the window in the nothingness. :) I love my parents, probably the coolest set of individual to get together on the face of the planet.

Posted on March 17, 2012, in ऐसा भी होता है...... and tagged , , , , , , , , . Bookmark the permalink. Leave a comment.

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