This is a collection of urdu poetry that sprang out of my mind at different times. I have collected them all and here i publish them
Ishq
इश्क़ वो भी फ़रमाते हैं पर यह वो हमसे कभी फ़रमाते नहीं,
कहलाये हम आशिक़ तो हैं पर माशूक़ वो कहलाते नहीं|
Kaun
अर्श में वो हैं ज़मी में वो हैं,
आफ़ताब में वो हैं, चांदनी में वो है,
ख़ुशी में वो हैं, गमी में वो हैं,
ज़्यादती में वो हैं, कमी में वो हैं,
तपिश में वो हैं, नमी में वो हैं,
अब तो हम ही में वो है, अब तो हम ही में वो है|
Vaham
रहने दे थोड़ा वहम इस खुशफहमी का ही है नतीजा,
कि हम तेरे दर से आज भी गुज़रते हैं|
Mohur
वफ़ा से ऐतबार तो कबका उठ चूका था ऐ खुदा,
तुने तो बस उस पर अपनी मोहर लगा दी|
Zindagi
मुफलिसी में कट रही है जैसी भी है ज़िन्दगी
हमको तो ऐसी पसंद है जैसी भी हो ज़िन्दगी|
Recent Comments