आज

20 07 2011

आज अरसे बाद फिर रोने को जी चाहता है,
खुद
 की खोज में खुद ही को खोने का जी चाहता है|

बस
 आगे दौड़ रहा हूँइस दौड़ में कितना खोयाऔर कितना पाया,
इसका क्या कभी कोई हिसाब कर पाया
मिलते
-बिछड़ते हर किसी से एक अलग रिश्ता बनाया|

साथ
 मेरे अब भी उन सबों की खुशबू है,
बस
 अब फर्क नहीं कर सकताकौन मैं और कौन तू है|

मुड़
 कर देखा तो पाया कुछ कदमों पहले कितने बावलेकितने पागल थे हम,
आज
 फिर उसी तरह पागल होने को जी चाहता है,
आज
 अरसे बाद फिर रोने का जी चाहता है|

एक
 ही आगाज़एक ही राह और अनजानी मंजिल को बाँटा था साथ जिनके,
अब
 अलग मंजिलअलग इरादेअलग रस्ते है उनके|

कभी-कभी किसी दोराहेचौराहे पर सुस्ताते हुए मिल जाते है,
कुछ
 पल साथ बैठयादें गर्म कर अपनी-अपनी  राह पर निकल जाते है|

उन
 सबके साथ एक बार फिर से हो लेने को जी चाहता है,
आज
 अरसे बाद फिर रोने को जी चाहता है|

कुछ अधुरा छुट गया हैलगता है यूँ ही हर बार,
मन
 का लालच है या दिल का प्यार|

क्या
 कभी यह लालच कम होगा,
यह
 जो मोह है क्या कभी ख़त्म होगा|

रह
 गए है जो अधूरे पल उनको फिर एक धागे में पिरोने को जी चाहता है,
आज
 अरसे बाद फिर रोने को जी चाहता है|








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