कक्षा में सभी ने बना ली थी अपनी-अपनी महिला मित्र
हमने जब उनसे पुछा तो बोली पहले देखो अपना चरित्र|
रोज़ कॉलेज के सामने वाली गुमटी पर कई बार जाते हो,
और दो-चार सिगरेट तो एक ही दम में पी जाते हो|
रही सही कसर पास का कथित फॅमिली ढाबा पूरी कर देता है,
और कॉलेज छुटते ही waiter तुम्हारा प्याला भर देता है|
इस सबके बाद बावजूद तुम चाहते हो की हम तुम्हारी महिला मित्र बने,
और तुम्हारा जीवन शाहरुख़ का चलचित्र बने|
अरे शर्म करो, किस मुंह से हमसे यह पूछते हो?
क्या हमे अनजान भोली और नासमझ बूझते हो|
हमने बात को संभाला कहा जिसे तुमने देखा वो कोई और था,
शायद I C Branch का कोई काला चोर था|
वो बोली अरे shut up हमारा vision perfect है,
और तुम्हारा identification exact है|
रोज़ गुमटी के पीछे आम के पेड़ के नीचे धूम्र दंडिका सुलगते हो,
और ढाबे से निकल कर हमारी ही बस के आगे पगलाते हो|
हम समझे कि आज तो फंसे गए भाई! हमने बात को कुछ यूं घुमाया|
अरे सिगरेट तो हम प्राणायाम करने के लिए पीते है,
रामदेव कहते है जो साँसों को साध लेते है वो ज्यादा जीते है|
और रही बात हमारी ढाबे पर पीने कि हाला का प्याला
तो बच्चन जी भी कह गए है कि मंदिर मज़्जिद बैर करते और मेल कराती मधुशाला|
तो सुंदरी देर न करो, आओ हमारा आलिंगन करो,
वो बोली फ़िलहाल तो हमारे सेंडल का चुम्बन करो|
जड़ के सबके सामने अपनी पादुकाएं वो जाते रहे,
और दर्द से हम वहीँ करहाते रहे|
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