महिला मित्र

26 04 2011

कक्षा में सभी ने बना ली थी अपनी-अपनी महिला मित्र

हमने जब उनसे पुछा तो बोली पहले देखो अपना चरित्र|

रोज़ कॉलेज के सामने वाली गुमटी पर कई बार जाते हो,

और दो-चार सिगरेट तो एक ही दम में पी जाते हो|

रही सही कसर पास का कथित फॅमिली ढाबा पूरी कर देता है,

और कॉलेज छुटते ही waiter तुम्हारा प्याला भर देता है|

इस सबके बाद बावजूद तुम चाहते हो की हम तुम्हारी महिला मित्र बने,

और तुम्हारा जीवन शाहरुख़ का चलचित्र बने|

अरे शर्म करो, किस मुंह से हमसे यह पूछते हो?

क्या हमे अनजान भोली और नासमझ बूझते हो|

हमने बात को संभाला कहा जिसे तुमने देखा वो कोई और था,

शायद I C Branch का कोई काला चोर था|

वो बोली अरे shut up हमारा vision perfect है,

और तुम्हारा identification exact है|

रोज़ गुमटी के पीछे आम के पेड़ के नीचे धूम्र दंडिका सुलगते हो,

और ढाबे से निकल कर हमारी ही बस के आगे पगलाते हो|

हम समझे कि आज तो फंसे गए भाई! हमने बात को कुछ यूं घुमाया|

अरे सिगरेट तो हम प्राणायाम करने के लिए पीते है,

रामदेव कहते है जो साँसों को साध लेते है वो ज्यादा जीते है|

और रही बात हमारी ढाबे पर पीने कि हाला का प्याला

तो बच्चन जी भी कह गए है कि मंदिर मज़्जिद बैर करते और मेल कराती मधुशाला|

तो सुंदरी देर न करो, आओ हमारा आलिंगन करो,

वो बोली फ़िलहाल तो हमारे सेंडल का चुम्बन करो|

जड़ के सबके सामने अपनी पादुकाएं वो जाते रहे,

और दर्द से हम वहीँ करहाते रहे|








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